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अयोध्या का धार्मिक महात्म्य – RELIGIOUS SIGNIFICANCE OF AYODHYA

 हमारे देश के ऋषि महर्षियों ने जीव मात्र को मोक्ष प्रदान करने के लिए सप्त पुरिओं का वर्णन किया है जिसमे श्री अयोध्या जी का सर्व प्रथम स्थान बताया गया जैसा निम्नलिखित है । अयोध्या , मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिकापुरी, द्वारावती सप्तियता मोक्ष दायकः इसमें प्रथम स्थान श्री अयोध्या जी का ही बताया गया है. अवध धाम में हमारे भगवान श्री राम चन्द्र अपने अंशो के सहित चक्रवर्ती राजा दशरथ के यहाँ अवतार लिए । इस पूरी के महात्मय के विषय में बड़े बड़े महा मुनीन्द्र अम्लात्मा जान करके भी वैराग्य को भुला देते हैं । जैसा की कबिकुल भूषण संत शिरोमणि पूज्यपाद गोश्वामी श्री तुलसीदास जी अपने श्रीराम चरित मानस में वर्णन करते हैं और कहते हैं की महर्षि नारद और सनकादिक मुनि दर्शन के लिए श्री अयोध्या धाम में नित्य पधारते हैं । भगवान् श्री राम के दर्शन के लिए नित्य अयोध्या आते हैं. और नगर को देखकर ऐसा निमग्न होते हैं की बैराग्य ही भूल जाता है । Also Read:-   अयोध्या राम मंदिर का विवाद एवं इसका इतिहास – CONTROVERSY AND HISTORY OF AYODHYA RAM TEMPLE इसीलिए सम्पूर्ण श्री राम चरित मानस में केवल एक ही बार अ...

बच्चे का मुण्डन संस्कार क्यों कराया जाता है ? – WHY IS THE CHILD’S SHAVING CEREMONY DONE?

मुण्डन संस्कार को चूड़ाकरण संस्कार या चौलकर्म भी कहते है जिसका अर्थ है—वह संस्कार जिसमें बालक को चूड़ा अर्थात् शिखा दी जाए । बच्चे का मुण्डन संस्कार कराने के पीछे हमारे ऋषि-मुनियों की बहुत गहरी सोच थी । माता के गर्भ से आए सिर के बाल अपवित्रमाने गये हैं । इनके मुण्डन का उद्देश्य बालक की अपवित्रता को दूर कर उसे अन्य संस्कारों (वेदारम्भ, यज्ञ आदि) के योग्य बनाना है क्योंकि मुण्डन करते हुए यह कहा जाता है कि इसका सिर पवित्र हो, यह दीर्घजीवी हो। अत: यह बालक के स्वास्थ्य व शरीर के लिए नया संस्कार है। दूसरी बात गर्भ के बाल झड़ते रहते हैं जिससे शिशु के तेज की वृद्धि नहीं हो पाती है । इन केशों को मुंडवा कर शिखा रखी जाती है । कहीं-कहीं पर पहले मुण्डन में नहीं वरन् दूसरी बार के मुण्डन में शिखा छोड़ते हैं । शिखा से आयु और तेज की वृद्धि होती है । मुण्डन बालिकाओं का भी होता है, किन्तु उनकी शिखा नहीं छोड़ी जाती है । Read More:-  बच्चे का मुण्डन संस्कार क्यों कराया जाता है ? – WHY IS THE MUNDAN CEREMONY DONE?

क्या हिन्दू धर्म के अनुसार घर में कुत्ता पालना उचित है ?

 आवारा कुत्ते को भोजन देने का फल शास्त्रों ने बहुत ही अधिक बताया और साथ ही पालतू कुत्तों के पालन से भी बारह वर्षों तक सब प्रकार के एश्वर्य-प्रगति देखने को मिलता है पर बारहवें वर्ष के पश्चात घर में कलह-अशांति, केश-मुकदमा तथा बीसवें वर्ष ‘सर्वस्व’ से भी हाथ धोना पड़ सकता है इसलिए घर में कुत्ता पालन न करें। मेरा यह लेख शास्त्रमत से चलनेवाले धर्मावलंबियों के लिए है आधुनिक विचारधारा के लोग इससे सहमत या असहमत होने के लिए बाध्य नहीं है। महाभारत में महाप्रस्थानिक पर्व का अंतिम अध्याय, इंद्र, धर्मराज और युधिष्ठिर संवाद में इस बात का उल्लेख है। जब युधिष्टिर ने पूछा कि यह कुत्ता मेरे साथ यहां तक चलकर आया तो मै इस कुत्ते को अपने साथ स्वर्ग क्यों नहीं ले जा सकता? Read More:-  According to Hindu religion is it appropriate to keep a dog in the house?  

सबसे सस्ता वेंटिलेटर है ‘शंख’ – THE CHEAPEST VENTILATOR IS ‘CONCH’

शंख बजाने से शरीर में ऑक्सीजन की कभी कमी नहीं होगी फेफड़े रहेंगे स्वस्थ,, शंख बजाने के हैं अद्भुत फायदे …….🤔🤔 भारतीय परिवारों में और मंदिरो में सुबह और शाम शंख बजाने का प्रचलन है। अगर हम रोजाना शंख बजाते है, तो इससे हमें काफी लाभ हो सकता है। इसके लाभ बताना एक पोस्ट में संभव नहीं यहाँ कुछेक लाभ के बारे में बता रहा हूँ 1. रोजाना शंख बजाने से  गुदाशय की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। शंख बजाना मूत्रमार्ग, मूत्राशय, निचले पेट, डायाफ्राम, छाती और गर्दन की मांसपेशियों के लिए काफी बेहतर साबित होता है। शंख बजाने से इन अंगों का व्यायाम हो जाता है। 2. शंख बजाने से श्वांस लेने की क्षमता में सुधार होता है। इससे हमारी थायरॉयड ग्रंथियों और स्वरयंत्र का व्यायाम होता है और बोलने से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्याओं को ठीक करने में मदद मिलती है। Read More:-  सबसे सस्ता वेंटिलेटर है ‘शंख’ – The Cheapest Ventilator is ‘CONCH’

पतितपावनी सरयू नदी का पौराणिक महत्त्व – ABOUT SARYU RIVER

 जहां तक श्री अयोध्या धाम स्थित है वहां तक सरयू नदी को महर्षियों ने ब्रम्हा स्वरूपनी सरयू की संज्ञा दिया है । चूँकि भगवान् राम के कुल गुरु श्री बशिष्ट जी महाराज मानसर से पैदल चलकर आगे आगे बशिष्ट जी चल रहे थे उनके पीछे सरयू मैया आयीं गुरुदेव के लेन के कारण सरयू का एक नाम बशिष्टा भी है । अयोध्या में स्थित सरयू जी में स्नान करने से कलिकाल के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं अब क्यूं अयोध्या में ही सरयू स्नान से पाप नष्ट हो जाते हैं इसका उत्तर है । अयोध्या अपने आप में पूर्ण ब्रम्ह है और सगुण रूप श्री सरयू जी हैं । यह मृत्यु लोक में नही है अयोध्या भगवान् विष्णु के चक्र पे बसी है । Also Read:-  अयोध्या का धार्मिक महात्म्य – RELIGIOUS SIGNIFICANCE OF AYODHYA अयोध्या च पूर्ण ब्रम्ह सरयू सगुणन पुमान तन्नि बासी जगन्नाथम सत्यं सत्यं बदम्यहम अयोध्या में रहने वाले भगवान् विष्णु के तुल्य हैं । चुकी अयोध्या ब्रम्ह स्वरुप होने के कारण इनको ब्रम्ह स्वरूपिणी कहा गया । सरयू का तात्पर्य स से सीता रा से राम जू इसलिए सीता राम जू द्रव रूप में होके भक्त के भावों से इस जल को सीता राम जू का सगुण रूप माना गया...